मंगलवार, 10 नवम्बर 2009

जोधपुर की लाइफ लाईन कायलाना झील


कायलाना एक कृत्रिम झील है जिसका उद्देश्य  वर्षा के पानी को बांध बना कर एकत्रित करना था.मारवाड़ में वर्षा का जल अमूल्य था तथा इसके संरक्षण के पर्याप्त  उपाय किये जाते थे.कायलाना और तखत सागर दो झीलें हैं तथा कायलाना का ओवर फ्लो तखत सागर में जाता है.पहले ये दोनों झीलें बरसात में लबालब भर जाती थी और गर्मी आते आते लगभग सूख जाती थीं.पर अब ऐसा नहीं है अब यह झील बारह महीने भरी रहती है.सतलज व्यास लिंक के द्वारा हरिके बेराज से लेकर लिफ्ट कैनाल से जोधपुर तक हिमालय का पानी  पहुँचाने का काम राजस्थान में होता है.जोधपुर के आस पास के अनेक गांवों में भी पीने का पानी यहाँ से सप्लाई किया जाता है.इसके किनारे एक उपेक्षित सा बगीचा है.कुछ काम नहीं आने वाली नावें हैं.आसपास पहाडों पर आत्म हत्या नहीं करने बाबत स्लोगन लिखे हैं क्यों कि यहाँ हर वर्ष कुछ दुर्घटनाएं अवश्य होती हैं.पास में एक रास्ता बिजोलाई ,मचिया सफारी पार्क ,सिद्ध नाथ ,भीम भड़क जाता है जो सभी बड़े दर्शनीय स्थल  हैं.चूँकि यह झील अपनी भराव क्षमता से ज्यादा भरी रहती है इसलिए शहर के पुराने मकानों में अंडर ग्राउंड में पानी का रिसाव होने लगा है और धीरे धीरे यह समस्या विकराल होने वाली है.शायद कोई हादसा हो और हम चेतें.

शनिवार, 7 नवम्बर 2009

बडली का प्रसिद्ध भेरुंजी का मंदिर


 जोधपुर-जैसलमेर नेशनल हाईवे पर जोधपुर से तेरह किलोमीटर कि दूरी पर एक गाँव है बडली.यह नाम वहां पर अति प्राचीन बड  के वृक्ष के कारण पड़ा है.इसी वृक्ष के पास सात सौ साल पुराना भेरुंजी का मंदिर है.यह मंदिर शिहाजी द्वारा बनवाया गया था जिन्होंने राठोड वंश के राजपूतों को कन्नोज से लाकर मारवाड़ में बसाया था.अनेक जाति व संप्रदाय के लोग यहाँ पुत्र उत्पन्न होने पर जात-जडुले के लिए आते हैं.

भैरव का अर्थ होता है भय का हरण कर जगत का भरण करने वाला। ऐसा भी कहा जाता है कि भैरव शब्द के तीन अक्षरों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की शक्ति समाहित है। भैरव शिव के गण और पार्वती के अनुचर माने जाते हैं। हिंदू देवताओं में भैरव का बहुत ही महत्व है। इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है
यह भगवान का साहसिक युवा रूप है। उक्त रूप की आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय की प्राप्ति होती है। व्यक्ति में साहस का संचार होता है। सभी तरह के भय से मुक्ति मिलती है। काल भैरव को शंकर का रुद्रावतार माना जाता है। काल भैरव की आराधना के लिए मंत्र है- ।।ॐ भैरवाय नम:।
यहाँ अनेक महात्माओं ने तप किया है जिनकी अखंड ज्योत आज भी मंदिर में जलती रहती है.
इस मंदिर में रविवार को दर्शनार्थियों का ताँता लगा रहता है.ऐसी मान्यता है कि भेरुं जी का प्रशाद घर नहीं ले जाया जाता मंदिर में ही बाँटना चाहिए.कुछ लोग भेरुं जी को मदिरा भी प्रशाद रूप में चढाते हैं.मंदिर के सामने एक पुरानी बावडी है जिसमें अब गन्दा पानी भरा है अगर इस इलाके पर ध्यान दिया जाय तो इसे रमणीक धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है.



मंगलवार, 3 नवम्बर 2009

मियानी का चमत्कारी शिव मंदिर



जोधपुर से सोजत के ग्रामीण बस सेवा मार्ग पर एक गाँव है मियानी जो मुख्यतया कुम्हारों का गाँव है .यहाँ एक शिव मंदिर है जो काफी प्रसिद्ध है.जाट जाति कि  एक लड़की अन्य गाँव से ब्याह कर इस गाँव में आई .वो प्रतिदिन शिव जी को जल चढा कर ही भोजन करती थी परन्तु मियानी में कोई मंदिर नहीं था अतः उसने भोजन करने से इंकार कर दिया.सपने में पभु ने दर्शन दे कर कहा कि वो उसके खेत में मौजूद हैं जहाँ पूजा कर वह भोजन प्राप्त करे.वह लड़की खेत में घूमी जहाँ उसे शिवलिंग के दर्शन हुए .बड़ी धूमधाम से पूजा हुई और बाद में मंदिर का निर्माण करवाया गया.यहाँ श्रद्धा से पूजा अर्चना करने पर मनोकामना पूर्ण होती है.

मंगलवार, 27 अक्तूबर 2009

पुष्कर का पवित्र सरोवर


पुष्कर का पवित्र सरोवर अब इस हाल में है.पुष्कर का विश्व प्रसिद्ध पशु मेला शुरू हो चुका है और कार्तिक एकादशी से लेकर पूनम तक पवित्र सरोवर में डुबकी लगा कर पुण्य कमाने के लिए इन पांच दिनों में लगभग पांच लाख लोग पुष्कर पहुंचेंगे.लगभग ३५ हजार विदेशी भी राजस्थान की ग्रामीण संस्कृति की झलक देखने के लिए यहाँ पहुचेंगे.लेकिन इस महान पवित्र सरोवर की दुर्दशा आप देख रहें हैं.जन समूह को हिन्दू धर्म के आस्था के प्रतीक इस सरोवर में डुबकी लगाने के बजाय एक कृत्रिम  टैंक में कृत्रिम रूप से भरे पानी में डुबकी लगा कर ही संतोष करना पड़ेगा.है ना अफ़सोस की बात.सरकार को तो इससे लेना देना ही क्या है.समय पर इसका desilting कराया होता ,गहरा करवाया होता ,घाटों पर बनी अवैध होटलों को हटाया होता ,आस पास की पहाडियों से वर्षा के  पानी को सरोवर तक पहुँचने के मार्ग में हुए अतिक्रमण को हटाया होता ,तो शायद यह नौबत नहीं आती. 

शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2009

कालबेलिया राजस्थान का एक प्रसिद्ध नृत्य


कालबेलिया राजस्थान कि एक प्रसिद्ध नृत्य शेली है.यह सपेरा जाति का नृत्य  है.इसमें गजब का लोच और गति है जो दर्शक को सम्मोहित कर देता है.यह नृत्य दो महिलाओं द्वारा किया जाता है.ये बहुत घेरदार काला घाघरा पहनती हैं जिसपर कसीदा होता है कांच लगे होते हैं और इसी तरह का ओढ़ना और कांचली-कुर्ती होते हैं.राजस्थानी लोक गीतों पर ये फिरकनी कि तरह नाचती हैं तो देखने वाले के मुंह से वाह निकले बिना नहीं रहती.इस नृत्य की मशहूर कलाकार गुलाबो कई बार विदेशों में इस नृत्य को प्रस्तुत करके वाहवाही लूट चुकी हैं.संगीत के लिए बीन और डफ बजाया जाता है और लोक कलाकार और अपनी सुरीली आवाज में लोक गीतों का जादू बिखेरतें हैं.जब भी आप राजस्थान आयें इस नृत्य को देखना न भूलें. 

मंगलवार, 20 अक्तूबर 2009

रशीदा में एक दिन गुजार कर तो देखिये



एक  दिन गाँव के इस मकान में गुजार कर तो देखिये.बस जरा सी मुश्किलें हैं मसलन बिजली नहीं है यानि फ्रीज़ ,टी.वी.पंखा कुछ नहीं है शाम के बाद एक टिमटिमाता दिया है,खाने को बाजरे का सोगरा और कढी है ,पानी एक किलोमीटर दूर ट्यूब वेल से लाना पड़ेगा और शौच के लिए अल सुबह जंगल में जाना पड़ेगा पुरुष खुले में नहाएँगे महिलाओं के लिए दो दीवार खडी कर आड़ बनायीं गई है.शुद्ध हवा है ,ढूध दही छाछ है ,आत्मीयता है,अपनापन है.और आप जुड़ जाते हैं भारत कि उस सत्तर प्रतिशत जनता से जो इसी तरह कि सुविधा रहित जीवन शेली का अभ्यस्त है.यह रशीदा गाँव के एक मकान का चित्र है.जीवन कितना सरल है और हमने  उसे कितना कठिन बना रखा है. 

शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2009

जोधपुर के आस पास वन्य जीव


जोधपुर के आसपास के छेत्रों में अनेक वन्य प्राणी स्वछंद विचरण करते हुए देखे जा सकते हैं.इनमे प्रमुख हैं हिरण,ब्लैक बक ,नील गाय,मोर,लोमडी ,खरगोश आदि.सुबह शाम हिरणों के झुंड के झुंड कुलाँचे भरते हुए नजर आयेंगे.इसी इलाके में सलमान खान शिकार प्रकरण हुआ है.यहाँ के लोग वन्य जीवों से छेड़ छाड़ पसंद नहीं करते हैं .बस दूर से निहारिए कैमरे में कैद कीजिये और आगे बढ़ जाइये किसी और दिलकश नज़ारे की तलाश में.मेरा व्यक्तिगत अनुभव है की अगर आप वास्तव में वन्य जीवों से प्रेम करते हैं तो आप को बहुत कुछ देखने को मिलेगा पर अगर आप वन्य जीवों के प्रति मन में हिंसा का भाव रखते हैं तो आपको निराश ही होना पड़ेगा.