अहा , ग्राम्य जीवन भी क्या है ...?re simple than village life...
Some true stories about village life
जोधपुर के आसपास ग्राम्य जीवन की झलकियाँ
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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2009
रशीदा में एक दिन गुजार कर तो देखिये
एक दिन गाँव के इस मकान में गुजार कर तो देखिये.बस जरा सी मुश्किलें हैं मसलन बिजली नहीं है यानि फ्रीज़ ,टी.वी.पंखा कुछ नहीं है शाम के बाद एक टिमटिमाता दिया है,खाने को बाजरे का सोगरा और कढी है ,पानी एक किलोमीटर दूर ट्यूब वेल से लाना पड़ेगा और शौच के लिए अल सुबह जंगल में जाना पड़ेगा पुरुष खुले में नहाएँगे महिलाओं के लिए दो दीवार खडी कर आड़ बनायीं गई है.शुद्ध हवा है ,ढूध दही छाछ है ,आत्मीयता है,अपनापन है.और आप जुड़ जाते हैं भारत कि उस सत्तर प्रतिशत जनता से जो इसी तरह कि सुविधा रहित जीवन शेली का अभ्यस्त है.यह रशीदा गाँव के एक मकान का चित्र है.जीवन कितना सरल है और हमने उसे कितना कठिन बना रखा है.
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शनिवार, 19 सितंबर 2009
माया की माया से बातचीत
माया की माया से बातचीत मेरे जीवन का अनोखा अनुभव था.एक माया न्यूयार्क से आई हैं और दूसरी ने अपने गाँव से बाहर कदम नहीं रखा.एक को सिर्फ अंग्रेजी आती है दूसरी को सिर्फ मारवाडी.हाँ,एक समानता जरूर है दोनों को धुम्रपान का शौक है.दोनों अपनी अपनी भाषा में बोलती रही और इशारों इशारों में सारी बात हो गयी.सारे संसार में नारी की पीडा एक जैसी है ,समझोता करने वाली और न करने वाली एक दूसरे का दुःख दर्द अच्छे से समझती हैं.मैं तो इनकी ट्यूनिग से विस्मित था की दुभाषिये का रोल भी अदा नहीं कर सका.में ऐसा करके उनके वार्तालाप में व्यवधान भी नहीं करना चाहता था.
शुक्रवार, 11 सितंबर 2009
पंचकुटा राजस्थान में प्रचलित एक सब्जी
पंचकुटा राजस्थान में प्रचलित एक प्रमुख खाद्य है .वास्तव में यह राजस्थान में पाई जाने वाली पॉँच वनस्पतियों से बनाई गयी एक सब्जी है.यह वनस्पतियाँ निम्न हैं १.कैर २.कुमटिया ३.सांगरी ४.गोंदा ५.साबुत लाल मिर्च राजस्थान की जलवायु के अनुसार यहाँ रेगिस्तान में पाई जाने वाली प्रजातियों से बनाई गई इस सब्जी को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है .बड़ी बड़ी पंच सितारा होटलों में इसे परोसा जाता है. विधि :-उपरोक्त पांचो सब्जियां बाजार में सूखी मिलती हैं ,अगर आप चाहें तो मौसम में जब इसका फल वृक्षों पर लगता है आप किसी भी खेत में से इसे तोड़ कर घर पर सुखा सकते हैं.पहले इसे रात भर पानी में भिगो दिया जाता है और सुबह अच्छे तेल मसाले में छोंक लिया जाता है.यह सब्जी काफी दिन तक ख़राब भी नहीं होती.
इन वनस्पतियों का विवरण निम्नानुसार है
कैर
यह छोटे बेर की आकृति का फल है जो हरा ही पेड़ से तोड़ कर सुखा लिया जाता है.यह कांटेदार छोटी झाडी पर उगता है जिसका नाम केपेरिस डेसिदुआ है.यह जंगलों में बहुतायत से पाया जाता है.
सांगरी
इसका पेड़ काफी बड़ा होता है और इसकी लम्बी फलियाँ होती हैं.इसका नाम प्रोसोपिस सिनरेरिया है जिसे हिंदी में खेजडी कहते हैं. इस पेड़ का रेगिस्तानी इलाके में बहुत महत्व है.इसकी फलियों को तोड़ कर सुखा लिया जाता है जिसे सांगरी कहते हैं.
.कुमटिया
यह अकेसिया सेनेगल नामक पेड़ की फलियों के बीज होते हैं .इसका पेड़ भी जंगलों में बहुतायत से पाया जाता है.
गोंदा
इसका पेड़ काफी बड़ा होता है तथा एक ही पेड़ पर यह प्रचुर मात्र में लगते हैं,इनका आकार छोटी कांच की गोली जितना होता है .इसका आचार बहुत स्वादिष्ट होता है.इसका नाम कोर्डिया मिक्सा है.
लाल मिर्च
हरी मिर्च को तोड़ कर सुखा लिया जाता है तथा चटनी आदि के लिए काम में लिया जाता है.
इन वनस्पतियों का विवरण निम्नानुसार है
कैर
यह छोटे बेर की आकृति का फल है जो हरा ही पेड़ से तोड़ कर सुखा लिया जाता है.यह कांटेदार छोटी झाडी पर उगता है जिसका नाम केपेरिस डेसिदुआ है.यह जंगलों में बहुतायत से पाया जाता है.
सांगरी
इसका पेड़ काफी बड़ा होता है और इसकी लम्बी फलियाँ होती हैं.इसका नाम प्रोसोपिस सिनरेरिया है जिसे हिंदी में खेजडी कहते हैं. इस पेड़ का रेगिस्तानी इलाके में बहुत महत्व है.इसकी फलियों को तोड़ कर सुखा लिया जाता है जिसे सांगरी कहते हैं.
.कुमटिया
यह अकेसिया सेनेगल नामक पेड़ की फलियों के बीज होते हैं .इसका पेड़ भी जंगलों में बहुतायत से पाया जाता है.
गोंदा
इसका पेड़ काफी बड़ा होता है तथा एक ही पेड़ पर यह प्रचुर मात्र में लगते हैं,इनका आकार छोटी कांच की गोली जितना होता है .इसका आचार बहुत स्वादिष्ट होता है.इसका नाम कोर्डिया मिक्सा है.
लाल मिर्च
हरी मिर्च को तोड़ कर सुखा लिया जाता है तथा चटनी आदि के लिए काम में लिया जाता है.
सोमवार, 7 सितंबर 2009
पागल ब्राह्मण की दास्तान
जोधपुर के नजदीक के गांवों का भ्रमण करते समय एक गाँव में एक ब्राह्मण परिवार ने मुझे चाय पर आमंत्रित किया.बहुत सज्जन परिवार था.परिवार कि जानकारी लेते समय वृद्धा ने बताया कि उसका एक पुत्र विक्षिप्त है और उसे चैन से बाँध के रखना पड़ता है.मेरे आग्रह पर वे मुझे पिछवाडे में ले गयीं जहाँ उनका ३५ वर्षीय पुत्र चैनो से बंधा हुआ था.हमें देखते ही उसके दिल में आशा की किरण जगी कि शायद उसे इस जेल से मुक्ति मिलने वाली है और वह जोर जोर से चिल्लाने लगा.वह कह रहा था कि उसके कलेजे कि धड़कन तेज है ,उसके दिल का वाल्व ख़राब है जिसे तुंरत बदलाया जाना चाहिए.मैंने पूंछा यह सच कह रहा है क्या ,तब मुझे बताया गया कि इसका इलाज जोधपुर में कराया था पर कोई फायदा नहीं हुआ ,दिनोदिन इसकी विशिप्तता बढ़ी है.मुझे उसकी हरकतें पागल जैसी नहीं लग रही थी.चैन से बाँध के रखने से और घरवालों कि उपेक्षा से वह बहुत आहत लगा. इस व्यक्ति का नाम गणपत है इसके परिवार में पत्नी ,एक लड़की और दो लड़के हैं.पत्नी नरेगा में श्रमिक का काम करके जो वेतन लाती है उससे इस परिवार का गुजारा होता है.परिवार का हाल देख कर आँख में आंसू आना स्वाभाविक ही था.परिवार के लिए कुछ करने का संकल्प मन में उपजता है.ईश्वर सभी को स्वस्थ और प्रसन्न रखे.
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शनिवार, 29 अगस्त 2009
चारणी माता मंदिर

जोधपुर के आसपास सुरम्य प्रकृति के मनमोहक नजारों के अलावा धार्मिक आस्था एवं श्रद्दा के केंद्र ऐसे देवालय हैं जहाँ भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण करने आते हैं और साधक अपनी साधना को सफल बनाते हैं.ऐसे ही एक मंदिर में वैष्णव देवी की तरह ही एक गुफा में विराजमान चारणी माता के दर्शन हुए .जोधपुर से २० किलोमीटर दूर फिटकासनी गाँव के पास राजस्थान की पर्वत श्रंखला अरावली के ही एक हिस्से में चारणी माता का मंदिर है .पास में ही एक परिवार रहता है जो इस मंदिर की देखभाल करता है .धार्मिक स्थलों पर जाकर मन को एक अजीब सी शांति और रूह को सकून मिलता है और यही हमारी भागमभाग वाली जिन्दगी को एक नई उर्जा से भर देता है.
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