जोधपुर के नजदीक ही कुछ गाँव में शिल्पकार पत्थर की मुर्तियाँ घड़ने का काम करते हैं.इसकी मांग बड़े शहरों के अलावा विदेशों में भी है.जोधपुर में गुलाबी रंग का पत्थर बहुतायत से पाया जाता है जिसे छित्तर कहते हैं,जोधपुर का राजमहल जिसका नाम उम्मेद भवन पैलेस है वह भी इसी पत्थर से बना हुआ है.आने वाले समय में इसकी पहचान बन सकती है और यह अकाल की विभीषिका झेल रहे मारवाड़ के श्रमिकों के लिए रोजगार का वैकल्पिक साधन बन सकता है,
इसके अलावा छतरियां,बुर्ज ,जाली.नक्काशीदार झरोखे बनाने के लिए घोटारु नामक पत्थर काम में लाया जाता है.इस पत्थर पर नक्काशी करना आसान होता है.जैसलमेर के पीले पत्थर पर कि गई नक्काशी बेहद खूबसरत लगती है .जैसलमेर में बनी पटवों कि हवेली विश्व प्रसिद्ध है.




