अहा , ग्राम्य जीवन भी क्या है ...?re simple than village life...

Some true stories about village life

जोधपुर के आसपास ग्राम्य जीवन की झलकियाँ

गुरुवार, 1 अक्तूबर 2009

92 वर्षीय विधवा बग्तु देवी को मिली पेंशन


जोधपुर संभाग के सिरोही जिले में कालिंद्री के जरा आगे चारण बाहुल्य गाँव है पेशवा .यहाँ की ९२ वर्षीय विधवा बग्तु बाई पिछले ६५ वर्षों से अपने पेंशन के अधिकार के लिए लड़ रही थीं.इनके पति राजकीय सेवा में अध्यापक थे और १५ वर्ष तक निष्टा और लगन से बच्चों को पढाया.उसके बाद टी.बी.जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो अल्पायु में चल बसे.बग्तु बाई पर परिवार का बोझ आन गिरा परन्तु एक आस थी पति राज्य कर्मचारी थे पेंशन तो मिलेगी ही.स्कूल से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक अनेक बार हाथ फेलाए ,उच्चतम अधिकारीयों तक भी चिट्ठी पत्री लिखी पर कुछ हासिल नहीं हुआ.मानवाधिकार आयोग में प्रार्थना पत्र दिया ,नोटिस प्रमुख शासन सचिव वित्त विभाग Shri C.K.Mathew (चित्र बाएं ) को मिला परन्तु एक संवेदनशील अधिकारी होने के नाते उन्होंने इसे गंभीरता से लिया.सभी सम्बंधित अधिकारीयों की जयपुर सचिवालय में मीटिंग रखी गयी. ज्ञात हुआ की बग्तु देवी के पति द्वारा प्रदत्त सेवाओं का अभिलेख नहीं है पुनः शिक्षा विभाग के अधिकारीयों को निर्देश दिए की रिकोर्ड की गहराई से छानबीन की जाय.

अंततः कुछ रिकॉर्ड मिला और कुछ Mathew साहब ने सहयोगी अधिकारीयों की सलाह पर अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए बग्तु देवी के पति के सेवा काल को पेंशन योग्य मानते हुए पारिवारिक पेंशन  दिए जाने का निर्णय लिया.सम्बंधित अधिकारीयों को स्वयं बग्तु देवी के गाँव जाकर पेंशन भुगतान के आदेश दिए.जिससे किसी बिचोलिये के हाथों राशी का दुरूपयोग न हो.जब करीब चार लाख की राशी का चेक बग्तु देवी के हाथों में दिया गया तो उनकी आँखों में ख़ुशी के आंसू थे.

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