जोधपुर के आस पास अनेक गाँव मैं दरी बुनने का काम बड़े पैमाने पर होता है.अधिकांशत: यह काम मेघवाल जाती के लोंगो द्वारा किया जाता है.यह दरी इंडियन कारपेट के रूप मैं निर्यात की जाती है.मैं इस उद्योग से बहुत प्रभावित हुआ .यहाँ तक की कें विकिपीडिया पर एक वेब पेज भी बना डाला.
http://en.wikipedia.org/wiki/Dhurrie
यह ग्रामीण छेत्रों मैं रोजगार का अच्छा साधन है यह वो कुटीर उद्योग है जो शायद गांधीजी के सपनों का भारत बनाता है.अगर आप कभी जोधपुर की तरफ घूमने आएं तो यादगार के लिए एक दरी खरीदना मत भूलियेगा.