जोधपुर से मात्र १७ किलो मीटर दूर जब आप नागौर रोड पर जा रहे होते हैं तो एक रेलवे फाटक आता है यहीं दाहिने हाथ पर डा.नारायण सिंह मानेकलाव द्वारा स्थापित अफीम नशा मुक्ति केंद्र है.मेरा परिवार जर्मनी से आई एक २१ वर्षीय अतिथि पर्यटक बन्ते को लेकर मानेकलाव पहुंचा.यह महिला प्रचलित पर्यटक स्थलों को देखने में रूचि नहीं रखती थी.मानेकलाव में उस समय २५ अफीम की लत से ग्रस्त अपना इलाज करवा रहे थे.लगभग सभी युवा थे.उन में से कुछ तो अन्य प्रदेशों से आये थे.हमने डाक्टरों व् मरीजों से काफी देर बात की.सभी इलाज से संतुष्ट थे.इलाज लगभग तीन माह चलता है इस दौरान रोगी को वहीँ रहना पड़ता है.बहुत मामूली खर्च में यह इलाज हो जाता है.केंद्र के नियम कानून जरूर कड़े हैं जिसके बिना इलाज संभव भी नहीं हैं. ऊपर वाले चित्र में मैं बन्ते के लिए दुभाषिये का काम कर रहा हूँ .बन्ते ने अनेक प्रश्न रोगियों से पूछे लत कैसे लगी ,पैसे कहाँ से आते थे ,अफीम कहाँ मिलती थी ,परिवार की जानकारी आदि आदि .एक समाज शास्त्री की तरह उसने पूरा विवेचन किया.सच पूंछो तो मुझे भी पहली बार इस व्यसन की इतनी विस्तृत जानकारी मिली.डा.नारायण सिंह पदम श्री व पदमविभूषण से सम्मानित हैं व राज्य सभा के सदस्य भी रह चुके हैं. लोग सम्मान से इन्हें अफीम वाला बाबा कहते हैं.